5 Movies You have to watch before you DIE

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पाँच एकदम कमाल की movies
जो तुम्हें मरने से पहले कम से कम एक बार तो देखनी ही चाहिए।
वरना regret करोगे।
आत्मा बनके जब ऊपर से देखोगे कि लोग मजे कर रहे हैं,
तो बोलोगे— “Shit yaar, अगर जिंदा रहते देख लेता तो क्या ही scene होता!” 😄

अब तुम बोलोगे,
“ये क्या बोल रहा है?”
देखो, funda simple है।
आजकल इतनी ज़्यादा movies, series, web series और anime आ रही हैं
कि समझ ही नहीं आता—
अच्छी चीज है कहाँ?
और सच में अच्छी picture कैसे ढूंढें?

काश कोई ऐसी website होती
जहाँ real लोगों के real reviews
और proper percentage ratings देखने को मिलती।
ठीक है ठीक है…
ज़्यादा philosophy हो गई।
Direct point पे आते हैं।

इस video के अंदर
मैं तुम्हें 5 एकदम गजब movies recommend करने वाला हूँ,
जो मैंने खुद Mocktail नाम की website से ढूंढ कर निकाली हैं।
और trust me—
ये पाँचों movies इतनी hatke और इतनी damn powerful हैं
कि देखने के बाद तुम खुद बोलोगे,
“भाई मज़ा आ गया, क्या recommendation दी है!”

तो चलो अब बिना time waste किए,
इस list की पहली movie से शुरू करते हैं… 🎬🔥

5 Movies You have to watch before you DIE
5 Movies You have to watch before you DIE

Movie No. 1 – 12 Angry Men

तो इस movie को 93% perfection rating मिली हुई है।
मतलब एकदम absolute banger
बाकी 6% लोगों ने “Go For It” दिया है।
अब तुम बोलोगे— “93 + 6 तो 99 होता है?”
हाँ भाई, कोई एक अति-महारथी रहा होगा
जिसने टाइम पास में कुछ और दबा दिया होगा 😄

अब जब मैंने इस movie की rating देखी थी ना,
तो मैं genuinely ऐसा था—
“Damn, this looks good.”
और Mocktail पर rating देखने के बाद
जब मैं इसे देखने बैठा,
तो भाई मेरा दिमाग ही उड़ गया।

मैं literally बोल रहा था—
“What is this?”
इतनी हटके, इतनी different movie,
और वो भी आज से लगभग 70 साल पहले,
1957 में release हुई हुई।

Movie का नाम है 12 Angry Men
अब तुम बोलोगे—
“अरे यार, इतनी पुरानी movie कौन देखे?”
भाई, बस एक बार जाके देखो।
और देखने के बाद खुद बोलोगे—
“साला आज के टाइम में कोई ऐसा क्यों नहीं बनाता?”

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Movie No. 2 – Stolen

सबसे crazy बात ये है कि
इस movie का लगभग 99% हिस्सा सिर्फ एक ही कमरे के अंदर होता है।
हाँ भाई, एक ही room,
और पूरे डेढ़ घंटे तक movie चलती है।

Plot सुनने में बहुत simple है।
Court room में एक case आता है
जहाँ एक 18 साल के लड़के पर
अपने ही पिता का murder करने का आरोप है।
पूरी सुनवाई हो चुकी है।

अब वहाँ बैठे होते हैं 12 jurors,
जो judge की तरफ से ये decide करते हैं
कि लड़का guilty है या innocent

बस यहीं से game शुरू होता है।
एक room, 12 लोग,
और opinions का ऐसा टकराव
कि तुम स्क्रीन से नज़र ही नहीं हटा पाओगे।

No action,
no background music ka drama,
no masala—
सिर्फ writing, dialogues और human psychology।

और trust me,
ये movie देखने के बाद
तुम्हें modern cinema थोड़ा कम impressive लगने लगेगा। 🎬🔥

उस टाइम पे क्या होता था कि पूरा केस सुनने के बाद
judge खुद judgment pass नहीं करता था
Evidence क्या मिले, कहानी क्या है,
ये सब सुनने के बाद
12 jurors को एक room में बैठाया जाता था

अब उन 12 लोगों को आपस में ये decide करना होता था
कि वो 18 साल का लड़का guilty है या उसे छोड़ दिया जाए
बस इतनी सी कहानी है।

उसके बाद बस वही होता है—
discussion, discussion, discussion… और movie खत्म।

लेकिन भाई, इसी simple से plot के अंदर
जिस level की depth add की गई है,
वो next level है।
हर एक juror के character के through
society में पाए जाने वाले अलग-अलग तरह के लोगों का representation दिखाया गया है।

इससे ज़्यादा मैं spoiler नहीं देना चाहता,
लेकिन जो story screen पर unfold होती है
और जिस तरीके से इसे direct किया गया है,
वो genuinely marvelous है।

Honestly,
मैं बस यही wish करता हूँ
कि आजकल की movies
इसका 10% level का writing और direction भी achieve कर पाएं।

अब एक personal moment बताता हूँ।
इस movie का एक shot है
जिसे देखते ही मैं literally goosebumps में आ गया था।
ऐसा लग रहा था कि
बस अभी आँखों से पानी निकल जाएगा।
मैं genuinely बोल रहा हूँ—
I was like, “What?”

जैसा कि मैंने बोला, movie में 12 लोग हैं
और हर एक को एक अलग personality दी गई है।
इनमें से एक character ऐसा है
जो खुद को बहुत strong, macho, alpha male मानता है।

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वो proudly बोलता है कि
जब उसका बेटा 10–11 साल का था
तब से वो उसे “papa” नहीं, “sir” बुलाता है।

और यहीं से समझ आता है
कि ये movie सिर्फ एक case के बारे में नहीं है,
ये movie है ego, upbringing, mentality और human nature के बारे में।

एक और character है इस movie में
जो लोगों को judge करके instantly ek image बना लेने में माहिर है।
उसके हिसाब से अगर कोई slum में रहता है, गरीब है,
तो वो चोर ही होगा,
और उस इलाके के लोग तो murderers ही होते हैं।

भाई, जिस तरीके से movie इन सोचों को break करती है,
oh my God, next level है।

एक ऐसा इंसान जो discrimination में ultra-max expert है।
वो situations को logically या rationally नहीं,
बल्कि अपने personal bias के हिसाब से देखता है।

अब movie उसके साथ क्या करती है, पता है?
Sirf ek single shot में सब समझा देती है।

वो character खड़ा होकर
जोर-जोर से बोले जा रहा है—
“मेरी बात सुनो, मेरी बात सुनो।”
लेकिन कोई नहीं सुनता।

एक-एक करके बाकी characters
table से उठते हैं,
उससे मुंह मोड़ लेते हैं,
और camera भी धीरे-धीरे पीछे हटता जाता है

वो अकेला खड़ा बोलता रहता है,
बोलता रहता है…
और we are just moving away,
जैसे movie खुद बोल रही हो—
“तू बोलता रह भाई, अब कोई interested नहीं है।”

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फिर एक moment आता है
जब उसे realize होता है
कि अब उसकी बात कोई सुनने वाला नहीं है
थक-हार के वो बैठ जाता है।

और तभी camera फिर से move करता है,
वापस उस जगह आता है
जहाँ actually logical, rational बात हो रही होती है।

ये पूरी चीज
ek single shot में,
और वो भी 70 साल पहले बनी movie में
Incredible stuff, seriously.

Honestly,
अगर Mocktail जैसी website नहीं होती,
तो शायद मैं ये movie देखता भी नहीं।
इतनी strong rating देखकर ही curiosity बनी।

और best part क्या है?
Mocktail पर ये भी दिख जाता है
कि movie कहाँ available है
Prime Video पर rent पर है—
जो भी हो,
इस picture को miss मत करना।

अब चलते हैं movie number two पर।
इस बार मैं ek recent example लेता हूँ,
क्योंकि कुछ लोगों को
black-and-white, old movies से
thoda issue होता है।

अभिषेक बनर्जी की एक movie आई थी—
“Stolen”
थोड़ा-बहुत हल्ला हुआ था।
मैं खुद confused था
देखूं या छोड़ दूँ।

फिर कुछ time बाद
Mocktail पर देखा—
69% “Go For It”
और 29% “Perfection”

I was like, okay… this looks solid.

Side में Prime Video पर
subscription available दिखा,
तो मैंने click किया,
movie play की—
और भाई,
बहुत strong picture है।

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“मज़ेदार” कहना शायद गलत होगा,
लेकिन bahut achhi movie है।
सबसे scary part क्या है, पता है?
ये सब कुछ
real life में भी हो सकता है,
even tumhare saath.

Story simple है—
अभिषेक बनर्जी का character
रात के करीब 12 बजे
station जाता है
अपने भाई को लेने,
जो train से आ रहा होता है।

लेकिन जब वो station पहुंचता है,
तो देखता है
कि police ने उसके भाई को
चारों तरफ से घेर रखा है…

और यहीं से movie
slow-slow tighten होना शुरू होती है।

एक औरत उसे पकड़ लेती है और ऐसे-ऐसे
कपड़े आगे-पीछे करके चिल्लाने लगती है
कि इसने मेरा बच्चा चुराया है

क्योंकि भैया, सामने वाला Fortuner चलाता है,
मोटा पैसा है, बड़ा घर है।
तो पुलिस वाले भी casually बोल देते हैं—
“अरे छोड़ो जाने दो,
तुम बच्चा चोर थोड़ी लगते हो।”

लेकिन अभिषेक बनर्जी के भाई वाला character
काफी ज़्यादा नेक दिल है।
वो बोलता है—
“नहीं, मैं मदद करूंगा।”

अभिषेक बनर्जी का character उसे रोकता है—
“अरे क्यों पीछे पड़ रहा है यार?
उसका problem है, वो खुद देख लेगी।”

लेकिन फिर धीरे-धीरे,
जिस तरीके से ये लोग situation में
फँसते जाते हैं… फँसते जाते हैं,
भाई, जो भगदड़ मचती है ना,
वो माहौल next level intense हो जाता है।

Scary है, terrifying है,
लेकिन सबसे ज़्यादा जो चीज़ डराती है
वो ये कि सब कुछ बहुत realistic लगता है।

बहुत बड़ा shout-out movie के director को,
जिनकी ये first film है—
Karan Tejpal
Seriously, अगर अब तक नहीं देखी है,
तो ज़रूर देखो।
देखने के बाद
मुझे भी “thank you” बोलना
और Mocktail को भी।

Movie No. 3 – Homebound

अब चलते हैं movie number three पर।
इस movie का OTT link
अभी तुम्हें नहीं मिलेगा,
क्योंकि जब मैं ये video बना रहा हूँ,
ये अभी theatres में ही लगी हुई है।

अगर तुम्हारे आसपास लगी हो,
तो मौका मत छोड़ना।

मैं बात कर रहा हूँ
Ishaan Khatter
और Vishal Jethwa की movie
“Homebound” की,
जिसे direct किया है
Neeraj Ghaywan ने—
हां वही, Masaan वाले director।

और मज़े की बात ये है
कि ये movie
release से पहले ही
India की तरफ से Oscars के लिए select
हो चुकी है।

Mocktail meter कहता है—
83% Perfection
15% Go For It

अब तुम खुद अंदाज़ा लगा लो
कि level क्या होगा।

Movie कई heavy topics को touch करती है—
religion के base पर discrimination,
caste के base पर discrimination,
और अपनी identity से भागने की मजबूरी।

लेकिन दो चीज़ें
जो मुझे personally बहुत ज़्यादा touch कर गईं—

पहली,
अपना घर छोड़कर किसी और city में move करने की मजबूरी
क्योंकि अपना घर…
अपना घर ही होता है भाई।

Family होती है,
comfort होता है,
memories होती हैं।

I mean,
एक reason है कि
7 साल YouTube करने के बाद भी
मैं Kolhapur में ही रह रहा हूँ।
Mumbai या Delhi shift नहीं किया।

लेकिन इस picture के characters के पास
ये privilege नहीं है।
जब पैसा कमाने की बारी आती है,
काम के लिए मजबूर होना पड़ता है,
तो घर छोड़ना ही पड़ता है

इससे related second point यह है कि
जब तुम घर छोड़ चुके हो
और उसी बीच lockdown लग जाता है,
तो तुम्हें वापस आना है…
अपने घर वापस।

Vibe meter देख लो—
80% drama, 15% comedy,
तो तुम्हें idea लग जाएगा
कि ये किस type की picture है।

अगर आसपास theatres में लगी है
तो जाकर देख के आओ,
वरना OTT release का wait करना बिल्कुल worth it है।

Movie No. 4 – Ping Pong The Animation

अब चलते हैं next title की तरफ।
ये technically movie नहीं है,
लेकिन इसे खत्म करने में
ज्यादा time भी नहीं लगेगा।

Sirf one season,
11 episodes,
हर episode करीब 20 minutes का।
मतलब पूरे 3 घंटे में खत्म

लेकिन जो experience है ना—
वो next level है।

Mocktail meter कहता है—
76% Perfection, 24% Go For It
Personally, मैं चाहता हूँ
कि India में ये और ज़्यादा spread हो,
लोग इसे देखें और इसके बारे में बात करें।

Because Ping Pong The Animation is damn good.
It’s a proper banger.

Banger से याद आया—
मैं अपने YouTube channel पर
एक नई video series के बारे में सोच रहा था।
हर Wednesday release होगी,
perfect movie recommendations के साथ।

नाम होगा—
“Banger Wednesday”.
क्या कहते हो?

अब इस anime की बात करें तो—
पूरा concept, art style, story…
सब कुछ unique है।
ये table tennis के ऊपर based है।

Different players,
उनका mindset,
उनकी desires,
और वो क्या-क्या sacrifice करते हैं—
सब कुछ beautifully दिखाया गया है।

शुरू में थोड़ा odd लग सकता है,
लेकिन अगर तुम मुझ पर
थोड़ा सा भी trust करते हो,
तो please इसे continue करना।

End तक आते-आते
शायद तुम्हारे लिए perfection ना हो,
but Go For It तो 100% होगा
It’s that good.

मैंने इस पर
अपने channel पर dedicated video भी बनाई है,
वो भी देख लेना।

Mocktail पर जाओगे
तो इसका OTT link नहीं मिलेगा,
क्योंकि ये India में legally available नहीं है।
बस इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बोलूंगा।

Movie No. 5 – The Call

अब चलते हैं last movie की तरफ।

ये एक live-action South Korean film है।
अगर तुम्हें twist और suspense thrillers पसंद हैं
तो ये definitely तुम्हें पसंद आएगी।

Vibe chart कुछ ऐसा है—
35% thriller, 30% mystery
Netflix पर available है।
Mocktail meter—
82% Go For It,
बाकी Perfection।

Plot मैं बता सकता हूँ,
लेकिन थोड़ा सा भी बताया
तो spoiler हो जाएगा।

बस इतना समझ लो—
दो महिलाएं हैं,
जो landline phone पर
एक-दूसरे से बात करती हैं…
और कहानी पूरी दुनिया हिला देती है।

Movie का नाम है—
“The Call”

ये मुझे सबसे पहले Mocktail पर नहीं मिली थी,
किसी ने suggest की थी।
लेकिन देखने से पहले
जब Mocktail meter check किया,
इतना strong “Go For It” था
कि लगा—
देखना तो बनता है।

और नहीं भाई,
ये series Mocktail promote करने के लिए नहीं है।
लेकिन अगर तुम्हें अच्छी movies मिल रही हैं
और Mocktail भी promote हो रहा है—
तो problem क्या है?

इसलिए आज की class का शब्द याद रखो—
M O C T A I L — Mocktail 😉

Conclusion: 5 Movies You have to watch before you DIE

इस video को
अपने दोस्तों के साथ share कर देना।
खासकर उन दोस्तों के साथ
जिनके साथ बचपन में cricket खेला करते थे।
Old memories थोड़ी revive हो जाएंगी।

अगर तुम्हारे पास
movie या series suggestions हों,
तो comments में जरूर लिखना।

हम मिलेंगे अगली बार।
Take care,
सेहत का ध्यान रखो,
टाटा बाय-बाय।

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